Monday, 2 November 2026 · 9:01 pm IST
GroundWire

एमएलसी चुनाव: भाजपा-जदयू की साख पर सवाल, विधान परिषद में भी जन सुराज की दस्तक

विपक्ष के साथ भाजपा-जदयू के लिए भी चुनौती, निर्दलीय प्रत्याशियों ने बढ़ाया अपना प्रभाव

Prashant Kumar
Prashant Kumar
28 October 2026, 12:15 pm• 2 min read

प्रशांत कुमार क्राइम और खोजी पत्रकार है जो पिछले 15 सालों से क्राइम और अन्य मुद्दों पर लिखते है।

एमएलसी चुनाव: भाजपा-जदयू की साख पर सवाल, विधान परिषद में भी जन सुराज की दस्तक

पटना : बिहार की राजनीति में जन सुराज ने एक और सदन में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। विधानसभा चुनाव के बाद अब विधान परिषद के दरवाजे तक पहुंची प्रशांत किशोर की पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत के साथ अपना खाता खोल लिया है। जन सुराज के डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के निवर्तमान विधान पार्षद डॉ. मदन मोहन झा को 324 मतों से हराकर यह उपलब्धि हासिल की।

यह जीत महज एक सीट का परिणाम नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए विकल्पों की मौजूदगी का संकेत है। जन सुराज ने कांग्रेस से सीट छीनकर यह दिखाया है कि शिक्षक मतदाताओं के बीच भी उसे समर्थन मिला है। हालांकि, एक सीट के आधार पर पार्टी के व्यापक जनाधार का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों ने भाजपा और जदयू के सामने भी सवाल खड़े किए हैं। पटना में भाजपा के नवल किशोर यादव को राजद के डॉ. संजीव कुमार ने हराया, जबकि सारण में निर्दलीय राहुल राज ने जीत दर्ज की। तिरहुत में भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह अपनी सीट जीतने में सफल रहे। इस तरह चारों सीटों पर अलग-अलग दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत ने किसी एक दल के दबदबे की तस्वीर पेश नहीं की।
जन सुराज के लिए विधान परिषद में प्रवेश संगठनात्मक विस्तार का नया पड़ाव है। अब उसके सामने चुनावी जीत को शिक्षकों के मुद्दों पर प्रभावी प्रतिनिधित्व में बदलने की चुनौती होगी। दूसरी ओर, भाजपा-जदयू और पारंपरिक विपक्ष के लिए भी यह परिणाम संकेत है कि स्थानीय पकड़, उम्मीदवार की स्वीकार्यता और मतदाताओं के मुद्दे चुनावी गणित बदल सकते हैं। विधान परिषद में जन सुराज की पहली जीत ने बिहार की राजनीति में एक नए दावेदार की उपस्थिति दर्ज करा दी है। अब निगाह इस पर रहेगी कि पार्टी इस शुरुआत को कितनी दूर तक ले जा पाती है।