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क्या 2027 विधानसभा चुनाव में चल पाएगा अखिलेश का PDA रथ! या हावी रहेगा बीजेपी का 5 क फॉर्मूला?

यूपी विधानसभा 2027 चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे है वैसे-वैसे राजनीतिक तापमान चढ़ता जा रहा है। सभी राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस की ली है।

Shivam Sharma
Shivam Sharma
26 September 2026, 7:14 pm• 3 min read

शिवम शर्मा राष्ट्रीय राजनीति व क्राइम पर गहरी समझ रखने वाले पत्रकार व विश्लेषक है।

क्या 2027 विधानसभा चुनाव में चल पाएगा अखिलेश का PDA रथ! या हावी रहेगा बीजेपी का 5 क फॉर्मूला?

अखिलेश यादव पिछले चुनावों की तरह इस बार भी अपना रथ लेकर जनता के बीच निकल चुके हैं। अखिलेश यादव ने 2027 के चुनाव का आगाज कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले रायबरेली से किया है।

2022 में का नारा था यूपी के ये संदेश है रहे अखिलेश अबकी बार नारा पूरी तरह बदल गया है। इस बार समाजवादी पार्टी अपने रथ के सहारे PDA यानी पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरों को साधने की कोशिश में लगी है।

वहीं बीजेपी ने 2024 के लोकसभा नतीजों से सबक लेकर प्रदेश प्रभारी के रूप में विनोद तावड़े और धर्मपाल सिंह को फिर से संगठन महामंत्री बनाकर बूथ लेवल को मजबूत बनाने का काम सौंपा है।

साथ ही बीजेपी गैर यादव ओबीसी और '5 क' की रणनीति यानी कुर्मी, कायस्थ, कुम्हार, कहार और कोइरी की फॉर्मूला पर काम कर रही है। देखना ये होगा ये बीजेपी का फॉर्मूला कम कर पाएगा या नहीं।

क्या है अखिलेश का PDA फॉर्मूला

यूपी में पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक वोट लगभग 80% प्रतिशत है। 2022 के चुनाव में सपा को लभभग 80% यादव वोट मिला और गैर यादव ओबीसी लगभग 26 से 30 प्रतिशत मिला। जबकि जाटव मतदाताओं ने लगभग 65% बसपा को वोट दिया वही 20% बीजेपी के खाते में गया। सपा को जाटव वोट महज 10 से 12 प्रतिशत वोट ही मिल पाया था।

वही अगर अल्पसंख्यक समुदाय की बात रहे तो लगभग 78% मुस्लिम समुदाय ने एक मुस्त वोट किया वही बसपा को लगभग 9% और बीजेपी को 4 से 6 प्रतिशत वोट ही मिल पाया।

अखिलेश यादव इसी PDA को यूपी में सत्ता की चाभी बनाना चाहते है।

क्या काम कर पाएगा बीजेपी का 5 क फॉर्मूला या 2024 की तरह होगा हाल

जनता के बीच ये सवाल भी बना हुआ है कि जैसे 2024 लोकसभा चुनाव में INDIA गठबंधन 43 सीट जिसमें सपा 37 और 6 सीट कांग्रेस जीति थी वही बीजेपी गठबंधन को महज 36 सीट जीत पाया था।

2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को भारी नुकसान हुआ था बीजेपी ये दुबारा दोहराना नहीं चाहेगी। इसीलिए बीजेपी ने संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह को फिरसे कमान सौंपी है जो खुद ओबीसी समाज से आते है। वही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जो ओबीसी समाज का बड़ा चेहरा है उनकी भी सक्रियता काफी बढ़ गई है।

यूपी में गैर यादव ओबीसी आबादी लगभग 29% है बीजेपी इस बार PDA की काट के गैर यादव ओबीसी को अपने पाले में करने के फार्मूले पर काम कर रही है।

यूपी देश का सबसे बड़ा राज्य है इसीलिए बीजेपी अच्छे खासी सीटों के साथ जितने की हर संभव कोशिश कर रही है।