Tuesday, 15 September 2026 · 4:40 pm IST
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बिहार बाढ़ से परेशान और जिम्मेदार मौन क्यों?

हर साल बाढ़ से परेशान बिहार के विकास सिर्फ नेता के वादे और कागजों तक सीमित

Binu Pandey
Binu Pandey
15 September 2026, 3:49 pm 3 min read

बिनु पाण्डेय करेंट इवेंट्स और ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ इंटरव्यू करने वाले पत्रकार हैं। राजनीति और आम जनमानस से जुड़े मुद्दों पर लेखन एवं रिपोर्टिंग में रुचि रखते हैं।

बिहार बाढ़ से परेशान और जिम्मेदार मौन क्यों?

बिहार एक बार फिर बाढ़ के चपेट में

नेपाल से सटे व गंगा नदी के निचले इलाकों में बिहार के 15 जिलों के लगभग 48 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। सरकार ये जरूर बता रही है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती के प्रसव पर सहायता मिलेगी, बच्ची जन्मी तो 15 और बच्चा जन्मा तो 10 हजार सरकार देगी और ये भी गिनवा रही है कि लाखों लोगों को खाना खिलाया जा रहा है, खाने के हजारों पैकेट बांटे जा रहे हैं, सैकड़ों नाव के साथ राहत कर्मी लगे हुए है। लेकिन सरकार ये बताने में असमर्थ है कि हर साल इन जिलों में आने वाले बाढ़ को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहें है, जिससे बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या कम हो या उनको पुनर्वास की व्यवस्था कैसे की जाए।

भोजपुर में करीब 6 लाख लोग प्रभावित, पिछले साल जवइनिया तो इस साल पिपरपाती की बारी

उदाहरण के तौर पर भोजपुर जिले में गंगा खतरे के निशान से ऊपर है, करीब 6 लाख लोग प्रभावित हैं, सैकड़ों स्कूल बाढ़ की वजह से बंद हैं। बच्चों का भविष्य बाढ़ में जैसे रास्ते और स्कूल डूब गए है, वैसे उनके सपने भी डूब रहे है। किसानों के 25 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल क्षतिग्रस्त हो गए इन सबका जिम्मेदार आखिर कौन है? इसी जिले के जवइनिया गांव में पिछले साल बाढ़ के कारण सैकड़ों घर गंगा नदी में विलीन हो गए थे, हजारों लोग प्रभावित हुए, कई को गांव छोड़ कर जाना पड़ा, जिसकी खबर लोकल से लेकर नेशनल मीडिया में चलाई गई, लेकिन हुआ क्या?
इस साल जिले के पिपरपाती गांव में कटान चालू है, कई घर बह गए, असंख्य लोग प्रभावित है। स्थानीय विधायक, सांसद से लेकर जिम्मेदार मौन है और जनता परेशान.. बिहार के जितने भी जिले प्रभावित है, सबकी स्थिति लगभग एक समान है।

सरकार चुनाव के समय वादे जरूर करती है, लेकिन उसपे अमल नहीं..

बिहार को बाढ़ मुक्त सिर्फ नेताओं के भाषणों और चुनावी साल तक सीमित रहता है, उसके बाद ठंडे बस्ते में चला जाता है। जनप्रतिनिधि और समाजसेवी चूड़ा और बिस्कुट बांट कर अपना काम पूरा कर दे रहे है, क्योंकि स्थाई समाधान निकालने या सरकार से इस बारे में बात करने में असमर्थ है। ऐसे में बिहार से बाहर रह रहे लोग बिहार के विरासत और संस्कृति को लेकर सोशल मीडिया पर 'प्राउड बिहारी' लिखकर गर्व महसूस तो करते है। लेकिन यहां रह रहे लोग जो बाढ़ से प्रभावित है और रोटी, कपड़ा और मकान के लिए संघर्ष कर रहें हैं, उनकी कहानी कुछ और है।

मुख्यमंत्री ने कहा बाढ़ के स्थाई समाधान के लिए राज्य सरकार प्रयासरत

हिंदी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री जी से फोन पर बात हुई जिसमें उन्होंने ने बताया कि कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज चौहान के नेतृत्व में टीम भेजी जाएगी जो बाढ़ हुए क्षति का आकलन करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिहार में बाढ़ की समस्या के स्थाई समाधान के लिए प्रयासरत है।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री द्वारा कहे गए बातों का कितना असर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में देखने को मिलता है।