नेपाल में 26 अगस्त को आई प्राकृतिक आपदा के 14 दिन बाद भी बचाव कार्य जारी है। बचाव दल सबसे ज्यादा ध्यान तीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे सैकड़ों कर्मियों को सुरक्षित बाहर निकालने में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन भूमिगत सुरंगों में लगभग 121 कर्मियों के फंसे होने का अनुमान है। सुरंगों में लगातार पाइप द्वारा ऑक्सीजन पहुंचाया जा रहा है और उनसे संपर्क कर उनको बचाने में राहत व बचाव कर्मी दिन-रात एक कर दिए हैं।
जाको राखे साइयां मार सके ना कोय
ज्ञात हो कि इस विनाशकारी बाढ़ आने के नौ दिन बाद दो लोगों को बचाया गया था, जो कि त्रिशूली-3A जलविद्युत परियोजना में फंसे थे। संजय शाह और कबीर महार्जन नेपाल विद्युत प्राधिकरण में कार्यरत हैं। वहीं, 11वें दिन भी दो लोगों को बचाया गया था, जिसमें एक महिला और एक चीनी नागरिक शामिल है। अभी भी लोग चमत्कार की उम्मीद में हैं।
तबाह हो गईं हजारों जिंदगियां
इस भयावह बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 1365 शव बरामद हुए हैं, जबकि 5326 लोगों की तलाश जारी है। बचाव दल ने अभी तक 13 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। इस आपदा में भारतीय लोगों की भी संख्या कम नहीं है। अभी भी भारत के 275 लोग लापता हैं, वहीं 169 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इनमें तिब्बत क्षेत्र में 49 लापता भारतीय शामिल हैं।
नेपाल को हरसंभव मदद कर रहा भारत
भारत लगातार नेपाल की हर तरीके से मदद कर रहा है। अभी तक सात खेप में 95 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है बुधवार को भारत ने एक और खेप भेजा है जिसमें 35 टन राहत सामग्री और उपकरण शामिल है। इसके अलावा आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की पहचान के लिए भारतीय फॉरेंसिक दल भी नेपाल में कार्य कर रहा है वही एक भारतीय टनल बचाव टीम भेजी गई है जो नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है। जबिक
नेपाली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इंटरनेट मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठे और निराधार दावों के प्रति सावधान रहें। इस बीच, श्रीलंका ने भी नेपाल को दस लाख डालर की सहायता दी।


