इस उपग्रह से आपदा प्रबंधन, कृषि और मौसम की निगरानी को मिलेगी नई ताकत
नई दिल्ली: भारत ने 4 सितंबर 2026 को GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 यानी Earth Observation Satellite को सफलतापूर्वक श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड लॉन्च पैड से रवाना किया गया। EOS-05 को Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO) में स्थापित किया गया है। इसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी की लगातार और बड़े क्षेत्र में तस्वीरें लेने के लिए डिजाइन किया गया है।
क्या करेगा EOS-05?

इस उपग्रह से पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों की लगातार निगरानी की जा सकेगी। इसकी मदद से चक्रवात, बाढ़ और जंगलों में आग जैसी आपदाओं पर लगभग रियल-टाइम डेटा हासिल करने में मदद मिलेगी।
यह जरूरी क्यों है?
किसी आपदा के दौरान समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। सैटेलाइट से मिलने वाली ताजा तस्वीरों और डेटा से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि आपदा का असर कहां और कितना हुआ है।
महत्व क्यों?
EOS-05 भारत का पहला उपग्रह है जो पृथ्वी से 36000 किलोमीटर दूर भू-समकालिक कक्षा(Geosynchorous orbit) में स्थापित है, जो लगातार पृथ्वी की तस्वीरें और निगरानी संबंधी जानकारी जुटा सकता है। इससे पहले फरवरी 2022 में इसरो के PSLV-C52 मिशन द्वारा EOS-04 उपग्रह के साथ दो अन्य छोटे उपग्रहों INSPIRESat-1 और INS-2TD—को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा गया था।


