सिद्धार्थनगर जिले का बांसी राजघराना और उसकी राजनीतिक विरासत आज भी चर्चा में रहती है। इसी राजघराने से ताल्लुक रखने वाले जय प्रताप सिंह, जब से सिद्धार्थनगर बस्ती जिले से अलग हुआ, तब से 2022 तक हुए चुनावों में आठ बार विधायक चुने गए हैं। एकबार 2007 में समाजवादी पार्टी के लालजी यादव ने उन्हें हराया था। जय प्रताप सिंह प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।
चुनावी समीकरण क्या है?
बांसी विधानसभा में पिछले तीन विधानसभा चुनावों की बात करें तो 2007 में समाजवादी पार्टी के लालजी यादव ने जय प्रताप सिंह को हराया था। उसके बाद 2012 विधानसभा चुनाव में भी लालजी यादव ने राजा को कड़ी टक्कर दी थी और जय प्रताप सिंह मात्र 2,894 वोटों से जीते थे। इसमें राजा को 47,323 वोट मिले थे, वहीं लालजी को 44,429 वोट मिले थे।
2017 में जीत का अंतर काफी बढ़ गया। जय प्रताप सिंह को 77,548 वोट मिले, जबकि दूसरे स्थान पर रहे लालजी को 58,606 वोट मिले। जीत का अंतर 18,942 रहा। वहीं, 2022 में राजा को 84,596 वोट मिले और सपा के प्रत्याशी नवीन को 64,256 वोट मिले। जीत का अंतर बढ़कर 20,340 पहुंच गया।
इससे यह पता चलता है कि जो विश्वसनीयता राजा ने जनता के प्रति 2007 में खोई थी, उसको 2012 में कम अंतर से जीता, लेकिन उसके बाद उन्होंने क्षेत्र में विकास कार्य किए, तो शायद लोगों ने उन पर भरोसा जताया।
राजा के बारे में जनता की राय क्या है?
कुछ लोगों ने कहा कि राजा जी काम ठीक कर रहे हैं। सबके दुख-सुख में शामिल होते हैं। यहां कोई दिक्कत नहीं है, राजा जी ही जीतेंगे, कोई मुकाबला नहीं है।
वहीं, कुछ लोगों का कहना था कि राजा जी काम ज्यादा कुछ कराते नहीं हैं, बस राजा के नाम पर जीत जाते हैं। लालजी यादव जब थे, तब कुछ काम हुआ है। लेकिन राजाजी की लोकप्रियता के कारण या यूं कह लीजिए कि 2007 में हारने के बाद कुछ काम कराने लगे, तो जनता उनको वोट दे रही है।
क्या राजा जी जीतेंगे इस बार या होगा बदलाव?
बांसी विधानसभा के पिछले चुनावों के नतीजों पर नजर डालें तो जय प्रताप सिंह की जीत का अंतर 2012 के बाद लगातार बढ़ा है। वहीं, स्थानीय लोगों की राय में भी अंतर देखने को मिलता है। कुछ लोग उनके कामकाज और लोगों के दुख-सुख में शामिल होने को उनकी लोकप्रियता की वजह मानते हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्य अपेक्षा के मुताबिक नहीं हुए हैं। चुनावी नतीजे और लोगों की अलग-अलग राय यह संकेत देते हैं कि बांसी में जय प्रताप सिंह की राजनीतिक पकड़ बनी हुई है, लेकिन क्षेत्र के विकास को लेकर लोगों की अपेक्षाएं भी मौजूद हैं। जानकारी के अनुसार, पूर्व सांसद जगदम्बिका पाल की बेटी पूजा पाल भी बांसी विधानसभा में पिछले एक साल से सक्रिय है। अब देखना होगा 2027 विधानसभा में पार्टी किसे टिकट दे रही है, और इस साल का निर्णय किसके पक्ष में जाता है।


