संत कबीर नगर जिले में स्थित बखिरा झील को 1990 में पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया। उसके बाद 2 फरवरी 2022 को इसे रामसर स्थल में जोड़ा गया। बखिरा झील प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण है। यहां लगभग 113 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आने का उल्लेख वन विभाग के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में मिलता है। वहीं, उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म बोर्ड के अनुसार, यहां हर साल 23 से अधिक प्रजातियों के 40,000 से ज्यादा शीतकालीन जलपक्षी आते हैं। यह लगभग 29 वर्ग किलोमीटर यानी 2,894 हेक्टेयर में फैली हुई है। इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए रामसर साइट घोषित किया गया था।
रामसर स्थल क्या होता है?
रामसर स्थल ऐसी आर्द्रभूमि होती है, जिसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का क्षेत्र माना जाता है। इसका उद्देश्य जल, जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना है। हर साल 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया जाता है। इसमें झीलों, दलदली क्षेत्रों, नदियों के कुछ हिस्सों और अन्य आर्द्रभूमियों को उनके अंतरराष्ट्रीय पारिस्थितिक महत्व के आधार पर रामसर सूची में शामिल किया जा सकता है। भारत में वर्तमान में 103 रामसर स्थल हैं, वहीं उत्तर प्रदेश में 14 हैं। उदाहरण के तौर पर, ओडिशा की चिलिका झील, राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और जम्मू-कश्मीर में वुलर झील इत्यादि शामिल हैं।
बखिरा झील की वर्तमान स्थिति क्या है?
2 फरवरी 2022 को बखिरा को रामसर स्थल घोषित होने के बाद लोगों को लगा कि यहां विकास कार्य होंगे, पर्यटक आएंगे और उनको रोजगार मिलेगा। लेकिन आज करीब साढ़े चार साल बाद भी न इस झील के विकास के लिए कुछ किया गया, न यहां के लोगों को रोजगार मिला।
यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि ठंड के मौसम में बहुत कम लोग घूमने आते हैं, लेकिन एक बार जो यहां आ जाता है, वह दोबारा नहीं आता, क्योंकि यहां सरकार द्वारा पर्यटकों के लिए कुछ नहीं किया गया है।
विकास के नाम पर एक प्रवेश द्वार है और कुछ दूर तक सीसी के कार्य कराए गए हैं। लेकिन झील तक पहुंचने के लिए आपको खेतों के बीच से आना पड़ेगा, क्योंकि कुछ दूर के बाद सीसी रोड भी समाप्त हो जाता है।
यहां वन विभाग के कार्यालय तक जाने के लिए सीसी रोड है, क्योंकि वहां अधिकारियों को आना होता है। लेकिन झील तक जाने के लिए खेतों के बीच कच्चा रास्ता है। क्यों है ऐसा? क्योंकि वहां आम लोगों को जाना है। झील के पास लगा एक साइन बोर्ड भी टूटकर गिर गया है और उस पर धूल जम गई है।
जिम्मेदार मौन क्यों?
बखिरा झील मेहदावल विधानसभा के अंतर्गत आती है और यहां के स्थानीय विधायक निषाद पार्टी के अनिल कुमार त्रिपाठी हैं। 2022 में बखिरा को रामसर स्थल घोषित किया गया और उसी समय माननीय विधायक जी भी चुने गए। लेकिन लगता है कि बखिरा झील उनके एजेंडे में नहीं आती हो। तभी तो जिस पार्टी से विधायक हैं, उस पार्टी का पूरा नाम निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) है। लेकिन लगता है कि विधायक बनने के बाद निर्बलों की मदद करना नहीं चाहते।
अब देखना होगा कि बखिरा का विकास कब, कैसे और कौन करता है, ताकि झील के साथ-साथ यहां के स्थानीय मछुआरों और नाव चलाने वालों का भी दिन बदले। इसी उम्मीद में लोग हैं कि कोई ऐसा अधिकारी या नेता आए, जो बखिरा का विकास कर सके।


