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सिविल ड्रेस में पहुंचे जवानों को घेरा, हथियार छीनने का प्रयास; तीन हमलावर गिरफ्तार

Prashant Kumar
Prashant Kumar
8 October 2026, 12:38 pm• 4 min read

प्रशांत कुमार क्राइम और खोजी पत्रकार है जो पिछले 15 सालों से क्राइम और अन्य मुद्दों पर लिखते है।

सिविल ड्रेस में पहुंचे जवानों को घेरा, हथियार छीनने का प्रयास; तीन हमलावर गिरफ्तार

इनामी बदमाशों के खिलाफ चल रहे Anti-Crime Operation के बीच वैशाली में STF की टीम पर हमला पुलिस के लिए गंभीर चुनौती बनकर सामने आया है। मंगलवार को बिदुपुर थाना क्षेत्र के भैरौपुर चौक पर 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश दीवानी सिंह की गिरफ्तारी के लिए Raid करने पहुंची STF टीम को स्थानीय लोगों ने घेर लिया। सिविल ड्रेस में मौजूद जवानों के साथ मारपीट की गई और उनके हथियार छीनने का भी प्रयास किया गया। घटना में चार जवान घायल हुए। पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए तीन हमलावरों को गिरफ्तार किया है।

 

बताया गया कि STF टीम के पहुंचने के समय भैरौपुर चौक पर दो पक्षों के बीच Dispute चल रहा था। सिविल ड्रेस में जवानों को देखकर एक पक्ष ने उन्हें दूसरे पक्ष द्वारा बुलाए गए लोगों का समूह समझ लिया। इसी Misunderstanding में STF जवानों पर हमला शुरू हो गया। देखते ही देखते मामला Street Clash में बदल गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस दौरान गोलीबारी की बात भी सामने आई है, हालांकि पुलिस स्तर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

घायल जवानों की पहचान नरेंद्र कुमार, अमर कुमार, मुकेश कुमार और लक्ष्मण कुमार के रूप में हुई है। सभी को बिदुपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराया गया। सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ सुबोध कुमार, STF डीएसपी दीपक कुमार समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची।

 

पुलिस ने घटनास्थल के Video Footage और अन्य साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। तीन आरोपितों से थाने में पूछताछ की जा रही है। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए Search Operation चलाया जा रहा है।

 

एसपी शुभांक मिश्रा ने बताया कि STF टीम बदमाश की गिरफ्तारी के लिए गई थी, तभी स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान की जा रही है। घटना में शामिल सभी लोगों के खिलाफ Strict Legal Action किया जाएगा।

 

वैशाली में STF पर दूसरी बार हमला, आखिर क्यों?

 

भैरौपुर की घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि वैशाली में STF के साथ टकराव की यह दूसरी घटना बताई जा रही है। इससे पहले जंदाहा थाना क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप की सीसीटीवी देखने गई STF टीम के साथ मारपीट की बात सामने आई थी। उस मामले में पेट्रोल पंप कर्मियों की ओर से भी STF जवानों पर आरोप लगाए गए थे। हालांकि उस प्रकरण की FIR में क्या तथ्य दर्ज हुए और इन्वेस्टिगेशन किस स्तर पर है, इसकी अद्यतन स्थिति स्पष्ट नहीं है।

 

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने STF के Field Operation और Crowd Management को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सिविल ड्रेस में ऑपरेशन करने के दौरान स्थानीय परिस्थिति का सही Assessment नहीं हो पा रहा? क्या स्थानीय पुलिस के साथ Coordination और बेहतर होना चाहिए? या फिर आम लोगों और STF के बीच Communication Gap बढ़ रहा है?

 

सिर्फ एक्शन नहीं, भरोसा भी जरूरी

 

STF का मूल काम कुख्यात अपराधियों के खिलाफ Targeted Operation चलाना है। लेकिन जब किसी ऑपरेशन के दौरान पुलिस टीम ही भीड़ के निशाने पर आ जाए तो यह सिर्फ Law and Order Issue नहीं रह जाता, बल्कि Police-Public Trust का सवाल भी बन जाता है।

 

एसटीएफ की कार्रवाई को लेकर अलग-अलग मामलों में सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं। भरत तिवारी से जुड़े कथित फेक इनकाउंटर को लेकर उठे आरोप भी इसी बहस में कभी-कभी सामने आते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना उन्हें भैरौपुर की घटना का कारण मानना उचित नहीं होगा।

 

फिर भी पुलिस के सामने बड़ा सवाल यही है—क्या एसटीएफ की कार्रवाई का डर अपराधियों तक सीमित है या आम लोगों के बीच भी गलतफहमी और अविश्वास पैदा कर रहा है?

 

भैरौपुर की घटना के बाद जरूरत सिर्फ हमलावरों पर कानूनी कार्रवाई की नहीं, बल्कि एसटीएफ के Field Protocol, Local Coordination और Public Communication की भी समीक्षा की है। अपराधियों पर शिकंजा कसना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के साथ जनता का भरोसा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।