मंदार पर्वत पर युवती के साथ अभद्रता और धमकी का वीडियो प्रसारित करने का मामला महज एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि कानून को चुनौती देने वाले दुस्साहस की तस्वीर भी सामने लाता है। आरोपितों ने पहले युवती और उसके दोस्तों को डराया, फिर रुपये की मांग की और मांग पूरी नहीं होने पर वीडियो प्रसारित कर दिया। मानो सोशल मीडिया का चेहरा उनकी पहचान छिपाने के साथ पुलिस की कार्रवाई से भी बचा लेगा। लेकिन पुलिस की जांच में यह भ्रम टूट गया।
तीन जून को हुई घटना का वीडियो 22 सितंबर को पुलिस के संज्ञान में आया। जांच आगे बढ़ी तो छह से सात आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हुई। इनमें तीन आरोपितों की पहचान कर ली गई है। तीनों बाराहाट क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित कर संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, युवती अपने दो दोस्तों के साथ मंदार घूमने गई थी। इसी दौरान आरोपितों ने उसका हाथ पकड़ा और अभद्र व्यवहार किया। गाली-गलौज और धमकी के बाद युवती के दोस्त से ऑनलाइन 1500 रुपये अब्दुल्ला के खाते में ट्रांसफर कराए गए। रुपये मिलने के बाद उन्हें वहां से जाने दिया गया।
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, आरोपित लगातार रुपये की मांग करते रहे। रुपये नहीं देने पर युवती से जुड़ा वीडियो प्रसारित कर दिया गया। यही वह बिंदु है, जहां अपराध का स्वरूप केवल बदसलूकी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि डर, दबाव और सोशल मीडिया के दुरुपयोग तक पहुंच जाता है।
सोशल मीडिया नहीं बनेगा अपराध की ढाल
सोशल मीडिया पर चेहरा दिखाकर या डिजिटल पहचान के पीछे छिपकर अपराध करने वालों के लिए मंदार प्रकरण एक गंभीर चेतावनी है। वीडियो प्रसारित होना पुलिस के लिए जांच का आधार भी बना। घटनास्थल के सत्यापन और पूछताछ के बाद पुलिस आरोपितों तक पहुंची। भागलपुर प्रक्षेत्र के आइजी विवेक कुमार का बौंसी थाना पहुंचकर मामले की जानकारी लेना भी इसकी गंभीरता को दर्शाता है।


